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Budget 2021: बजट को है जानना, इन शब्दों का अर्थ समझना है जरूरी

यहां हम बजट में प्रयोग होने वाले कुछ शब्दों का अर्थ सरल तरीके से समझा रहे हैं.

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 01, 2021 पर 12:12 PM
Budget 2021: बजट को है जानना, इन शब्दों का अर्थ समझना है जरूरी

आज 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2021-22 का यूनियन बजट पेश करेंगी। बजट को समझना एक कठिन प्रक्रिया है क्योंकि इसमें जटिल शब्दावलियों का उपयोग होता है। यहां हम बजट में प्रयोग होने वाले कुछ शब्दों का अर्थ सरल तरीके से समझा रहे हैं जिससे वित्त मंत्री के बजट भाषण को समझने में आसानी होगी।

Fiscal deficit(फिस्कल डेफिसट यानी वित्तीय घाटा) - यह वो स्थिति है जिसमें सरकार का कुल खर्च उसके कुल कर आय से अधिक हो जाता है।

बजट एस्टिमेट (Budget Esitmates - बजटीय अनुमान) - किसी वित्त वर्ष के लिए किसी मंत्रालय या स्कीम के लिए आवंटित धनराशि

रिवाइज्ड एस्टीमेट - (Revised Estimates- संशोधित अनुमान) - 6 महीने के वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर मध्य वर्तीय अनुमान, जिसमें शेष बचे 6 महीने के लिए संभावित खर्च और प्राप्तियों का अनुमान होता है।

एनुअल अकाउंट ( Annual Accounts)- किसी बजटीय वर्ष की समाप्ति पर वास्तविक खर्च और प्राप्तियों का लेखा-जोखा

कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate tax)- किसी फर्म या कॉपोरेशन द्वारा अपनी आय पर चुकाया जाने वाला कर।

मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स (MAT)- वह मिनिमम टैक्स जो किसी भी कंपनी को चुकाना होता है। अगर कोई कंपनी जीरो टैक्स लिमिट के अंतर्गत आती है तो भी उसे ये टैक्स चुकाना होता है।

रेपो रेट(Repo Rate)-रेपो रेट वह दर होती है जिसपर बैंकों को आरबीआई कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन मुहैया कराते हैं। रेपो रेट कम होने का अर्थ है कि बैंक से मिलने वाले तमाम तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे। मसलन, गृह ऋण, वाहन ऋण आदि।

रिवर्स रेपो रेट(Reverse Repo Rate)- यह वह दर होती है जिसपर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है।

कैपिटल गेन (capital gain)- किसी निवेश पर मिलने वाले मुनाफे को कैपिटल गेन कहते हैं। आप किसी ऐसेट में निवेश करते हैं जो शेयर, बांड, प्रॉपर्टी या गोल्ड हो सकता है। जब आप इस ऐसेट को बेचने जाते हैं तब तक उसके दाम बढ़ जाते हैं। खरीद और बिक्री के दाम के बीच का अंतर आपका मुनाफा या कैपिटल गेन होता है और इस पर लगने वाला टैक्स कैपिटल गेन्स टैक्स। अलग अलग ऐसेट जैसे शेयर, बांड, प्रॉपर्टी, गोल्ड पर टैक्स की दरें अलग - अलग होती हैं। साथ ही साथ लांग टर्म और शॉर्ट टर्म की परिभाषा भी अलग होती है।

मिसाल के तौर पर अगर आप एक साल से कम समय में शेयर बेच देते हैं तो आपको 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। साल भर से ज्यादा वक्त के बाद मुनाफा वसूली करने पर 10 फीसदी लांग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। प्रॉपर्टी पर निवेश के लिए लांग टर्म का फायदा दो साल के बाद मिलता है। साथ ही इसमें इंडेक्सेशन बेनिफिट भी मिलता है। सरकार एक इंडेक्स जारी करती है जो ये बताता है कि महंगाई के साथ आपकी प्रॉपर्टी के दाम कितने बढ़ने चाहिए । इस इंडेक्स के आधार पर आपकी प्रॉपर्टी खरीद का दाम बढ़ाकर फिर मुनाफे की गणना की जाती है। सोने, बांड और डेट म्यचुअल फंड में निवेश पर लांग टर्म तीन साल के बाद माना जाता है।


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